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Updated on: 25 September, 2026 12:29 PM IST
गेहूं की खास किस्म (Image Source-AI generate)

देश के किसान गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं और अब रबी सीजन की भी बस शुरुआत हो ही गई है और ऐसे में किसानों के मन में सवाल होगी की इस रबी सीजन किस गेहूं की किस्म की बुवाई करने से अच्छी उपज प्राप्त हो सकती है. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, इंदौर किसानों के लिए लेकर आया है गेहूं की उन्नत किस्म पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 जिसकी पैदावार कर किसानों को बड़ा मुनाफा हो सकता है. चलिए आगे जानते हैं इस किस्म की खासियत के बारे में पूरी जानकारी.

क्यों खास है गेहूं की HI 1683 किस्म?

पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 को ब्रेड गेहूं यानी Triticum aestivum के रूप में दर्शाया गया है. इस किस्म की प्रमुख विशेषताओं में उच्च उत्पादन क्षमता, विभिन्न परिस्थितियों में स्थिर एवं संतुलित उपज और अच्छी दाना गुणवत्ता शामिल हैं. इसलिए गेहूं की यह किस्म इतनी लोकप्रिय है. साथ ही इस किस्म की खासियत यह है कि इससे प्राप्त गेहूं का इस्तेमाल रोटी, चपाती, आटा और अन्य खाद्य उत्पादों के लिए किया जा सकता है. यानी की किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी यह किस्म महत्वपूर्ण हो सकती है.

पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 कितनी मिलेगी पैदावार?

अगर आप इस रबी सीजन पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 की पैदावार कर रहे हैं, तो इससे आप औसत उपज लगभग 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकता है और वहीं, अनुकूल परिस्थितियों और उचित कृषि प्रबंधन के तहत इससे किसान संभावित उपज 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं. 

हालांकि वास्तविक उत्पादन खेत की मिट्टी, मौसम, सिंचाई, बुवाई के समय, उर्वरक प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और अन्य कृषि परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. इसलिए किसान स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इसकी खेती संबंधी तकनीक अपनाएं.

बायोफोर्टिफाइड गेहूं की क्या है खासियत?

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने HI 1683 को बायोफोर्टिफाइड गेहूं के रूप में प्रस्तुत किया गया है. बायोफोर्टिफिकेशन का उद्देश्य फसल की पोषण गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है और इस किस्म में प्रोटीन लगभग 11.7 प्रतिशत, आयरन करीब 40.4 ppm और जिंक करीब 38.3 ppm पाया जाता है, जो किस्म को गेहूं की अन्य किस्मों से अलग दिखाता है. इस तरह यह गेहूं केवल उत्पादन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पोषण गुणवत्ता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है.

खेती से पहले इन बातों का रखें ध्यान

किसान किसी भी नई गेहूं की किस्म को बड़े क्षेत्र में लगाने से पहले अपने क्षेत्र के लिए इसकी उपयुक्तता की जानकारी जरूर लें. बुवाई का सही समय, बीज की गुणवत्ता, बीज दर, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण फसल की उपज को प्रभावित करते हैं. ऐसे में किसान भाई अपनी स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग या संबंधित कृषि विशेषज्ञ से क्षेत्र विशेष के लिए अनुशंसित खेती तकनीक की जानकारी जरुर लें, ताकि बाद में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़ें.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Rabi Season Special Wheat Variety for High Yield
Published on: 25 September 2026, 12:41 PM IST

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