भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित उन्नत मक्का की किस्में किसानों के लिए अधिक उत्पादन के साथ बेहतर पोषण वाली किस्में है. किसान इन किस्मों में केवल अधिक पैदावार ही नहीं, बल्कि प्रो-विटामिन-ए, लाइसिन, ट्रिप्टोफैन और उच्च गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त कर सकते हैं और कम समय में अच्छी पैदावार कर डबल इनकम अर्जित कर सकते हैं.
आइए जानते हैं IARI द्वारा विकसित मक्का की टॉप 3 किस्मों की खासियत-
1.पूसा एच.क्यू.पी.एम.-1
पूसा एच.क्यू.पी.एम.-1 उन्नत एक उन्नत संकर (Hybrid) मक्का किस्म है, जिसे देशभर के लिए अनुशंसित किया गया. यह किस्म खरीफ, रबी और वसंत तीनों मौसमों में सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है. अगर किसान भाई इस खरीफ सीजन इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो इस किस्म से मात्र 111 से 129 दिनों में फसल तैयार कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
खासियत- इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका शानदार उत्पादन है. उत्तर पहाड़ी क्षेत्र में इसकी औसत उपज 81.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में 75.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में 64.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 83.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा मध्य-पश्चिमी क्षेत्र में लगभग 64.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है.
2. पूसा बायोफोर्टिफाइड संकर मक्का-1
पूसा बायोफोर्टिफाइड संकर मक्का-1 किस्म यह मुख्य रूप से उत्तर पहाड़ी क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के किसानों के लिए अनुशंसित है. इसकी खेती खरीफ मौसम में की जाती है. साथ ही इस किस्म की पैदावार कर किसान लगभग 64.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं.
खासियत- मक्का की इस किस्म परिपक्वता की बात करें तो यह किस्म उत्तर पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 107 दिन और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में लगभग 86 दिन में तैयार हो जाती है. साथ ही इस बायोफोर्टिफाइड किस्म में प्रो-विटामिन-ए 6.60 पीपीएम, लाइसिन 3.37 प्रतिशत और ट्रिप्टोफैन 0.72 प्रतिशत पाया जाता है. इसके अलावा इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मौजूद होता है, जिससे यह पोषण की दृष्टि से बेहद उपयोगी किस्म बन जाती है.
3. पूसा एच.एम. 4 नर बंध्य बेबी कॉर्न
बेबी कॉर्न की खेती करने वाले किसानों के लिए पूसा एच.एम. 4 नर बंध्य बेबी कॉर्न एक बेहतरीन विकल्प है. इसे वर्ष 2021 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए विकसित किया गया. यह संकर किस्म खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है.
खासियत- इस किस्म की औसत छिलका रहित भुट्टा उपज 22.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल 51 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में फसल लेकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह