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Updated on: 17 October, 2026 5:26 PM IST
नीम की खली और पत्तियों से करें फसल की सुरक्षा
  • नीम का उर्वरक, कीटनाशी एवं रोगनाशी आदि के रूप में विभिन्न उपयोग।

उर्वरक के रूप में खली का प्रयोग करने से भूमि के अंदर पाए जाने वाले सभी प्रकार के किट जैसे दीमक, कटुआ, सफेद गिंडार, आम की गुजिया,टिडे आदि  नष्ट हो जाते हैं। इससे फसल स्वस्थ रहती है। कीटों से फसलों की सुरक्षा भी होती है। इसी प्रकार से नीम की खली का प्रयोग अनेक फसलों के रोग में नियंत्रण में भी प्रभावी पाया गया है।

नीम की पत्ती 5 किलोग्राम 10 लीटर पानी में तब तक उबालें  जब तक यह 2.5 लीटर न रह जाए। अब इस 2.5 लीटर नीमयुक्त पानी में 100 लीटर पानी मिलाकर प्रति एकड़ धान की फसल पर छिड़काव करें। इस छिड़काव से धान का गांधी कीट, हरा फुदका,भूरा फुदका, रस चूसने वाले कीटों से धान की फसल को बचाया जा सकता है। नीम के इस घोल से बैगन के तना छेदक एवं फल छेदक कीट से बचाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त टमाटर में फली छेदक कीट का भी नियंत्रित किया जाता है। नीम की पत्तियों के अर्क से कपास, सब्जी तथा दलहनी बीजों का उपचार करने से बीज जनित रोगों का नियंत्रण होता है।

नीम का तेल दुर्गन्ध युक्त एवं उसमें कड़वापन होने के कारण सभी फसलों एवं पौधों की पत्ती, फूल, अथवा फल पर कीड़ों को विकसित करता है। नीम का तेल 1 से 2 लीटर की मात्रा में प्रति एकड़ छीड़काव करने से काटने, चबाने एवं रस चूसने वाले कीड़े नष्ट हो जाते हैं तथा कीटों के अंडे से बच्चे भी नहीं निकाल पाते।

नीम तेल के दो प्रतिशत घोल का प्रयोग कर चूर्णित आसिता रोग का नियंत्रण किया जा सकता है। नीम के 0.5 प्रतिशत घोल का प्रयोग  कद्दू वर्गीय फसलों में 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। ईश्वर से कद्दू वर्गीय फसलों में रोग नियंत्रण के साथ ही साथ 50 से 70% तक फसल की वृद्धि भी होती है।

2.5 किलोग्राम नीम का बुरादा 2.5 से 3.0 किलोग्राम लहसुन तथा 250 से  300 ग्राम खाने वाला तंबाकू का पेस्ट बना ले। इस पेस्ट में 2 लीटर गोमूत्र या मिट्टी का तेल मिलाकर धन या गेहूं की फसल पर छिड़काव करें। इस छिड़काव से सभी हानिकारक व  रोगों का प्रभावी ढंग से नियंत्रित होता है।

5 किलोग्राम निम्बोली यानी नीम का फल रात भर के लिए शाम को भिगो दे। इस नीम का फल को सुबह उबालकर और गाढ़ा पेस्ट बना लेते हैं। इस पेस्ट में 100 लीटर पानी मिलाकर घोल बना ले और प्रति एकड़ की दर से फसलों पर छिड़काव करें। सभी फसल, सब्जी तथा बागों में कीट नियंत्रण के लिए एक उपयुक्त कीटनाशी है।

5 किग्रा नीम के सुखे बीजों को साफ करके उसके छिलकों को हटाकर नीम की गिरी निकाल लेते हैं। इस नीम की गिरी  को पीसकर पाउडर बना लेते हैं। इस पाउडर को 10 लीटर पानी में डालकर रात भर रखते हैं। इस गोल को सुबह किसी लकड़ी के डंडे से हिला कर मिलाएं  तथा महीन कपड़े से छान लेते हैं। इस घोल में 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिलाकर फिर  150 से लेकर 200 लीटर पानी में मिलाएं। यह एक उपयुक्त कीटनाशी है जो की एक एकड़ की फसल के छिड़काव हेतु पर्याप्त है।

25 से 30 किग्रा नीम की ताजी पत्तियां ले लें। इन पत्तियों को रात भर पानी में भिगो दें। सुबह इन्हें पीसकर पत्तियों का सत बना लें। अब इसमें 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिलाकर 150 लीटर पानी मिलाकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़काव करें। यह भी एक उपयुक्त कीटनाशी है।

10 किलोग्राम नीम की खली ले लें। इस रात भर पानी में भिगो दें। सुबह इस घोल में 100 लीटर पानी और 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिलाकर फसलों पर छिड़काव करें। 1 एकड़ क्षेत्रफल की फसल के लिए यह एक उपयुक्त कीटनाशी है।

1 लीटर नीम का तेल ले लें। इसमें 100 ग्राम कपड़ा धोने वाला पाउडर मिले तथा 100 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें। 1 एकड़ क्षेत्रफल की फसल के लिए यह पर्याप्त कीटनाशी है। 

अन्न भंडारण के लिए प्रयोग किए जाने वाले जूट के बोरे को 10% नीम के बीज के घोल में 15 मिनट तक बोरों को डुबोकर  और इन्हें छाया में अच्छी तरह सुखाकर अन्न भंडारण करें तथा बचे घोल को अन्न भंडारण वाले स्थान पर छिड़काव करें। इससे भंडारित अनाज कीटों से सुरक्षित रहेगा।

पादप विषाणु , सूत्रकृमि एवं कवक के  दुष्प्रभाव से फसल को बचाया जा सकता है। नीम के प्रयोग से गन्धी,तना छेदक, जैसिडस, फुदका,हेलियोथिस,  सफेद मक्खी , माहू

फल्ली बेधक, तंबाकू सूंड़ी  आदि कीटों का नियंत्रण किया जा सकता है।

लेखक, रबीन्द्रनाथ चौबे, ब्यूरो चीफ, कृषि जागरण, बलिया, उत्तरप्रदेश।

English Summary: Protect Crops Naturally with Neem Cake and Leaves Control Pests
Published on: 17 October 2026, 05:35 PM IST

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