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Updated on: 4 December, 2020 6:01 PM IST
Cordyceps Mushroom

आपने एक से बढ़कर एक जड़ी-बूटियों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या दुनिया की सबसे महंगी जड़ी बूटी के बारे में पढ़ा? हम एक ऐसी जड़ी-बूटी की बात कर रहे हैं जिसकी कीमत सोने से भी ज्यादा है. अगर 10 ग्राम सोना (Gold) की कीमत 50 हजार रुपए के करीब है तो इस जड़ी-बूटी की कीमत तर्राष्ट्रीय मार्केट में सूखी हुई हालत में करीब 60 लाख रुपए किलो तक है. इस हिसाब से इसकी कीमत सोने से भी ज्यादा महंगी हुई. जी हां, इसमें ऐसे शक्तिवर्धक और औषधीय गुण है कि हर जड़ी-बूटी इसके सामने फेल है. इसका इस्तेमाल पूरुषों की कमजोरी को दूर करने से लेकर कैंसर समेत कई तरह की बीमारियों में किया जाता है.इतना ही नहीं, बहुत से खिलाड़ी या रेसलर भी इसका इस्तेमाल करते हैं.

इसमें मौजूद शक्तिवर्धक गुणों की वजह से इसे हिमालयी वायग्रा (Himalayan Viagra) भी कहा जाता है. कीड़ा जड़ी की खास वजह ये भी है कि इसके इस्तेमाल से अंग्रेजी दवा की तरह सेहत पर कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पड़ता. आयुर्वेद के मुताबिक गुर्दे के रोग (Kidney disease) और सांस की परेशानी भी इससे दूर हो जाती है. इतना ही नहीं, इसके सेवन इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत हो जाता है. यही वजह है कि ये दुनिया में सबसे महंगी जड़ी-बूटी है.

कीड़ा जड़ी का वैज्ञानिक नाम (Cordyceps sinensis)

कीड़ी जड़ी एक तरह की फंगस है जिसका वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस (Cordyceps sinensis) है. इसके इंग्लिश में कॉर्डिसेप्स  मशरूम (Cordyceps Mushroom) भी कहते हैं. यह हिमालय के दुर्गम इलाकों में पाई जाती है. इसे कीड़ा जड़ी कहने के पीछे की ये सच्चाई है कि ये दिखने में कीड़ा जैसी होती है. इसमें आधा कीड़ा और आधी जड़ी होती है जिसके चलते इसे भारत में कीड़ा जड़ी के नाम से जाना जाता है.

कैसे पैदा होती है कॉर्डिसेप्स साइनेसिस (Cordyceps sinensis)?

इसकी कीमत इसमें मौजूद शक्तिवर्धक तत्वों के हिसाब से होती है. चीन में इसको ‘यारशागुंबा’ नाम से भी जाना जाता है. ‘यारशागुंबा’ एक तरह का जंगली मशरूम है जोकि एक विशेष कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसपर पनपता है. जिस कीड़े के कैटरपिलर्स या झिल्ली पर ये उगता है उसका नाम है हैपिलस फैब्रिकस, इसी लिए इसका वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस पड़ा.

कहां मिलती है कीड़ा जड़ी?

कॉर्डिसेप्स साइनेसिस (Cordyceps sinensis) या कीड़ा जड़ी हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में पैदा होती है. पहाड़ों के करीब 3500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लोग इससे अच्छे से वाकिफ है, क्योंकि ये इन इलाकों में पैदा होती है. उत्तराखंड, लद्दाख और चीन के हिमालयी दुर्गम क्षेत्रों में जब मई से जुलाई के बीच बर्फ पिघलना शुरू होती है तो इसके पनपने का चक्र स्टार्ट होता है. उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के चमोली और कुमाऊं मंडल के धारचुला में बहुत से परिवारों के लिए ये आय का स्त्रोत भी है. यहां के लोग इसे इकट्ठा करके बेचते हैं. आपको बता दें कि इसके महंगे दामों की वजह से इसकी तस्करी पर बैन है. कई बार करड़ों को कीड़ा जड़ी पकड़ी भी जाती है. भारत में उत्तराखंड के अलावा नेपाल, भूटान और चीन के हिमालयी क्षेत्रों में भी कीड़ी जड़ी मिलती है.

कीड़ा जड़ी में मौजूद तत्व

इस फंगस में प्रोटीन, पेपटाइड्स, विटामिन बी-1, बी-2 ,बी-12 और अमीनो एसिड समेत बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं.

कहां करें संपर्क? (contact)

इस तरह की मशरूम से मिलती-झुलती किस्म का उत्पादन देहरादून की दिव्या रावत कर रही हैं, जिन्होंने दुनियाभर में खूब नाम कमाया है. इतना ही नहीं, ये इसकी ट्रेनिंग भी देते हैं. लेब में तैयार की जाने वाली इस तरह की मशरूम की कीमत भी बहुत महंगी है. ज्यादा जानकार के लिए इनसे मिलकर जानकारी ली जी सकती है.

दिव्या रावत, सौम्या फूड प्राइवेट कंपनी, मोथरोवाला, देहरादून

English Summary: Price and production of Cordyceps sinensis
Published on: 04 December 2020, 06:03 PM IST

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