वर्तमान समय में वातावरण में तापमान की वृद्धि को देखते हुए किसान को सलाह दी जाती है कि आम में विभिन्न प्रकार के कीट लगते हैं, जिसमे आम का मधुआ कीट एवं लाल धारीदार फल बेधक का इन दिनों भारी प्रकोप देखने को मिल रहा है.
मधुआ कीट
मधुआ कीट, जिसे भूरा तना मधुआ कीट भी कहते है. आम पर बहुत नुकसानदायक होता है. यह कीट मंजर, पत्तियों और तनों का रस चूसकर फसल को बर्बाद कर देता है जिससे मंजर सूख जाता है. मधुआ के प्रकोप से फल तथा पत्तियों पर सहद के जैसा पदार्थ लग जाता है और उसमे फफूंदी लग जाती है. जिससे आम के फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पढता है. मधुआ कीट के प्रकोप से बचने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल 1 मिलीलीटर 3 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें या एसीफेट 75 एस पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें.
लाल धारीदार फल बेधक
लाल धारीदार फल बेधक आम की फसल के लिए एक गंभीर समस्या है, जो आम के फल में सुरंग बनाकर गुठली तक पहुंच जाता है उसे नुकसान पहुंचाता है, जिससे फल सड़ जाते हैं और गिर जाते है. इससे बचने के लिए जनवरी माह में तने पर क्लोरपायरिफास तथा साईपरमेथ्रिन मिश्रित दवा का पेड़ के तने पर छिड़काव करें या तव छिड़काव नहीं कर पाए है तो मटर के सामान फल होने पर अलफ़ामेथरीन 10 इ० सी० 1 मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें एवं दूसरा छिड़काव 15-20 दिन बाद करें.
साथ ही साथ किसान को ये भी सलाह दी जाती है कि आम और लीची के पौधों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करते रहें ताकि बगीचे की मिटटी में नमी बानी रहे. नमी की कमी होने पर फलों के गिरने की सम्भावना वड जाती है. साथ ही फल के समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पढता है. यदि फल गिरने की समस्या ज्यादा हो तो प्लानोफिक्स 1 मिलीलीटर 4 लीटर पानी मैं घोलकर स्टीकर के साथ छिड़काव करें. इससे फलों का गिरना कम हो जाता है.