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Updated on: 8 January, 2026 6:28 PM IST
महुआ प्रकृति का अनमोल वृक्ष

महुआ, जिसे अंग्रेज़ी में Butter Tree, Madhua अथवा Elloopa Tree कहा जाता है, भारतीय वनों और ग्रामीण संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुपयोगी वृक्ष है. यह एक विशाल, सीधा, घनी शाखाओं वाला मानसूनी वृक्ष होता है, जिसकी फैलती हुई डालियां और गोलाकार छत्र जैसी छाया दूर से ही आकर्षित करती है. महुआ मुख्य रूप से दोमट एवं हल्की पथरीली मिट्टी में भी सहजता से उगने की क्षमता रखता है. भारत में यह उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में व्यापक रूप से पाया जाता है.

महुआ की छाल राख के रंग की होती है, जो समय के साथ पतली परतों में उतरती रहती है. यह वृक्ष पत्तझड़ी होता है, जिससे फूलों के मौसम में इसकी सुंदरता और अधिक निखरकर सामने आती है. मार्च से अप्रैल के बीच महुआ में छोटे-छोटे, हल्के पीले रंग के अत्यंत मीठे, रसीले और सुगंधित फूल खिलते हैं, जो पकने के बाद स्वतः जमीन पर गिर जाते हैं और पूरे क्षेत्र को मादक सुगंध से भर देते हैं. यही फूल ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लिए पोषण, आय और परंपरा का आधार हैं.

महुआ वृक्ष की प्रमुख विशेषताएं

महुआ का तना मजबूत और मध्यम मोटाई का होता है, जबकि इसकी शाखाएं अत्यंत घनी और छायादार होती हैं. फूलों के भीतर गाढ़ा, चिपचिपा और प्राकृतिक शर्करा से भरपूर रस होता है, जो मधुमक्खियों, पक्षियों, हिरण, भालू तथा अन्य वन्य जीवों को आकर्षित करता है. यही कारण है कि महुआ जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है.

महुआ के फूल, फल और उनके विविध उपयोग

महुआ के फूल ताजे और सूखे, दोनों रूपों में उपयोग किए जाते हैं. सूखे फूलों से हलवा, खीर, लड्डू, मिठाइयां और कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इन फूलों से पारंपरिक मदिरा भी बनाई जाती है, जो सांस्कृतिक आयोजनों का हिस्सा होती है.

महुआ का फल सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि इसके बीजों से निकाला गया तेल खाना पकाने, साबुन निर्माण, दीपक जलाने और शरीर की मालिश में प्रयोग किया जाता है. तेल निकालने के बाद बची खली उत्कृष्ट जैविक खाद मानी जाती है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा में महुआ की भूमिका

महुआ आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के लिए केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत आधार है. फूल गिरने से पहले पेड़ के नीचे की जमीन साफ की जाती है, ताकि साफ और गुणवत्तापूर्ण संग्रह किया जा सके. इसके फूल ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट और खनिज तत्वों से भरपूर होते हैं. पशुओं के लिए इसकी पत्तियां उत्तम चारा हैं और पत्तों से पत्तल-दोने बनाकर स्थानीय रोजगार भी सृजित होता है.

आयुर्वेदिक महत्व और औषधीय गुण

आयुर्वेद में महुआ को एक प्रभावशाली औषधीय वृक्ष माना गया है. इसके फूल, बीज, तेल और छाल—सभी का चिकित्सकीय उपयोग होता है. सर्दी-जुकाम, खांसी, कफ, बवासीर, जोड़ों के दर्द, वायु विकार और त्वचा रोगों में महुआ लाभकारी माना जाता है. स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध की वृद्धि, मासिक धर्म की अनियमितता, शारीरिक कमजोरी और वीर्यवृद्धि में भी इसका उपयोग बताया गया है. बच्चों की सर्दी में महुआ के फूलों का काढ़ा विशेष लाभ देता है, जबकि तेल से मालिश करने पर शरीर को गर्माहट और मजबूती मिलती है.

लेखक- रबीन्द्रनाथ चौबे

ब्यूरो चीफ, कृषि जागरण बलिया, उत्तर प्रदेश

English Summary: Mahua tree detailed nutritional value livelihood benefits medicinal properties
Published on: 08 January 2026, 06:34 PM IST

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