Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 23 October, 2020 1:20 PM IST

लहसुन एक मसाले वाली फसल है. मुख्य रूप से इसकी खेती गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु में की जाती है. लहसुन की खेती अब बड़े व्यापार के रूप में विकसित होने लगा है. लहसुन का इस्तेमाल सब्जी के अलावा दवाई में भी की जाती है. लहसुन की खेती कर हमारे किसान भाई लाखों की कमाई कर रहे हैं. हालांकि हमारे कई किसान भाइयों को खेती के समय दो-चार होना पड़ता है. उन किसान भाइयों को अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. कृषि जागरण आपको बताने जा रहा है लहसुन की आधुनिक खेती करने के तरीके. तो आइए जानते हैं लहसुन की आधुनिक खेती के बारे में.

खेती के लिए उपयुक्त समय

लहसुन की खेती के लिए अक्टूबर या नवंबर का महीना उपयुक्त माना जाता है. इस महीने में लहसुन का कंद निर्माण बेहतर होता है. लहसुन की खेती न ज्यादा गर्म और न ज्यादा ठंड में की जा सकती है. इसे 1000-1300 मीटर समुद्र तल की ऊंचाई पर अच्छी तरह से उगाया जा सकता है.

लहसुन की उन्नत किस्में

अगर लहसुन की उन्नत किस्मों की बात करें, तो इनमें एग्रीफाउंड वाइट (जी. 41), यमुना वाइट (जी.1 ), यमुना वाइट (जी.50), जी.51 , जी.282 ,एग्रीफाउंड पार्वती (जी.313 ) और एच.जी.1 जैसे नाम पहले आते हैं. वहीं गोदावरी, श्वेता, भीमा ओमेरी भी उन्नत किस्में हैं.

बीज और बुवाई

लहसुन की बुवाई के लिए स्वस्थ और बडे़ आकार की शल्क कंदो (कलियों) का उपयोग किया जाता है. बीज का इस्तेमाल 5-6 क्विंटल / हेक्टेयर करनी चाहिए. सीधी शल्क कंदो का उपयोग बुवाई के लिए नहीं करना चाहिए. बुवाई के पूर्व कलियों को अनुशंसित कीटनाशक उपचारित करना चाहिए. लहसुन की बुवाई कूड़ों में, छिड़काव या डिबलिंग विधि से की जाती है. कलियों को 5-7 से.मी. की गहराई में गाड़कर उपर से हलकी मिट्टी से ढक देना चाहिए. बोते समय कलियों के पतले हिस्से को उपर ही रखते है. बोते समय कलियों से कलियों की दूरी 8 से.मी. व कतारों की दूरी 15 से.मी.रखना उपयुक्त होता है. बड़े क्षेत्र में फसल की बोनी के लिये गार्लिक प्लान्टर का भी उपयोग किया जा सकता है.

खाद और उर्वरक

लहसुन को खाद और उर्वरकों की ज्यादा मात्रा में जरूरत होती है. इसलिए इसके लिए मिट्टी की अच्छे से जांच कराकर किसी भी खाद व उर्वरक का उपयोग करना उचित माना गया है. साथ ही कम मात्रा में खाद व उर्वरक देने से बचना चाहिए.

लहसुन की सिंचाई

लहसुन की बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए. इसके बाद 10 से 15 दिनों के बाद सिंचाई करें. गर्मी के महीने में हर सप्ताह इसकी सिंचाई करें. जब इसके शल्क कन्दों का निर्माण हो रहा हो उस समय फसल की सिंचाई सही से करें.

लहसुन की उपज

अगर हमारे किसान भाई लहसुन की खेती बताई गई विधि से करेंगे, तो इसकी उपज प्रति हेक्टेयर 100 से 200 क्विंटल तक हो सकता है. हमारे किसान भाई इस उपज को बेचकर न सिर्फ खेती को आगे बढ़ा सकते हैं, बल्कि अन्य कार्य भी कर सकते हैं.

English Summary: know how to farm Garlic
Published on: 23 October 2020, 01:24 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now