Sugarcane Variety: गन्ने की नई किस्म Co-18022 (कर्ण-18) की खेती कर आय बढ़ाएं 16-17 अप्रैल को आयोजित होगा MIONP 2026: भारत को ऑर्गेनिक और लाभकारी कृषि की ओर ले जाने की पहल Success Story: बस्तर की मिट्टी से उभरी महिला एग्रीप्रेन्योर अपूर्वा त्रिपाठी, हर्बल उत्पादों से बना रहीं वैश्विक पहचान Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 21 January, 2026 2:47 PM IST
मक्का की नई उन्नत किस्में ‘वी एल मधुबाला’ और ‘वी एल लोफाई’

भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा ने उत्तरी पर्वतीय और उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के किसानों के लिए दो नई संकर मक्का किस्में विकसित की हैं. इनमें प्रमुख हैं ‘वी एल मधुबाला’ और ‘वी एल लोफाई’. ‘वी एल मधुबाला’ जल्दी तैयार होने वाली और उच्च उपज देने वाली स्वीट कॉर्न किस्म है, जबकि ‘वी एल लोफाई’ कम फाइटेट वाली जैव-सुदृढ़ीकृत मक्का किस्म है, जो पोषण में अधिक समृद्ध है.

ये किस्में किसानों को उच्च उपज, बेहतर स्वाद और पोषण प्रदान करने के साथ-साथ आय वृद्धि और बाजार उन्मुख खेती को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित की गई हैं. इससे पर्वतीय और उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में सब्जी आधारित कृषि को भी मजबूती मिलेगी.

वी एल मधुबाला: उच्च उपज और उत्कृष्ट स्वाद वाली स्वीट कॉर्न

‘वी एल मधुबाला’ संकर किस्म मीठी मक्का पंक्ति वी एस एल 26 और वी एस एल 38 के संयोजन से विकसित की गई है. अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों में उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में इसके छिले हुए हरे भुट्टों का औसत उत्पादन 11,438 किग्रा प्रति हेक्टेयर, जबकि उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में 11,454 किग्रा प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया. इस किस्म में हरे भुट्टों की तुड़ाई 72-75 दिनों में की जा सकती है, जिससे जल्दी फसल तैयार हो जाती है. वी एल मधुबाला में औसत कुल घुलनशील ठोस (TSS) 15.7 प्रतिशत पाया गया है, जो इसे स्वाद में मधुर और उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक बनाता है.

इस किस्म ने टर्किकम पर्ण झुलसा (Turcicum Leaf Blight) के प्रति मध्यम प्रतिरोध प्रदर्शित किया है. इसे उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) और उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली) में खेती के लिए अधिसूचित किया गया है.

वी एल लोफाई: कम फाइटेट और पोषण-संपन्न मक्का

‘वी एल लोफाई’ संकर किस्म वीबीएल 107 और वीबीएल 109 के संयोजन से विकसित की गई है. इसमें वीबीएल 107, मक्का पंक्ति वी 407 का चिन्हक सहायक चयन (MAS) आधारित कम फाइटेट संस्करण है, जबकि वीबीएल 109 चिन्हक सहायक चयन तकनीक द्वारा विकसित प्राप्तकर्ता और दाता लाइनों के संकरण से तैयार की गई है.

वी एल लोफाई जल्दी पकने वाली संकर किस्म है, जिसमें फाइटेट की मात्रा केवल 2.16 मिलीग्राम/ग्राम पाई जाती है. सामान्य मक्का में फाइटेट की मात्रा लगभग 3.0 मिग्रा/ग्राम होती है. फाइटिक एसिड (IP6) खनिजों को बांध लेता है, जिससे शरीर के लिए उनका अवशोषण कठिन हो जाता है. इसलिए कम फाइटेट मक्का अधिक पोषण-संपन्न मानी जाती है.

अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों के दौरान उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में वी एल लोफाई का औसत उत्पादन 6,046 किग्रा प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया. इसने टर्किकम पर्ण झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता भी प्रदर्शित की. इसे पूरे उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में खेती हेतु अधिसूचित किया गया है.

अधिसूचना के फायदे और महत्व

इन अधिसूचित मक्का किस्मों के माध्यम से किसानों को कई लाभ प्राप्त होंगे:

  1. उच्च उपज: वी एल मधुबाला और वी एल लोफाई दोनों ही किस्में उच्च उत्पादन देने में सक्षम हैं.

  2. जल्दी तैयार होने वाली फसल: वी एल मधुबाला की फसल 72–75 दिनों में तैयार हो जाती है और वी एल लोफाई 90–95 दिनों में.

  3. उत्कृष्ट स्वाद और पोषण: वी एल मधुबाला का स्वाद मधुर है, जबकि वी एल लोफाई कम फाइटेट होने के कारण पोषण में अधिक समृद्ध है.

  4. रोग प्रतिरोध: दोनों किस्मों ने टर्किकम पर्ण झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोध प्रदर्शित किया है.

  5. आय वृद्धि: उच्च उपज और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों की आय में वृद्धि होगी.

  6. बाजार उन्मुख खेती और सब्जी आधारित कृषि को बढ़ावा: इन किस्मों के माध्यम से किसानों को व्यवसायिक खेती के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे.

कम फाइटेट मक्का और पोषण सुरक्षा

फाइटिक एसिड की कम मात्रा वाले मक्का का लाभ यह है कि इसमें मौजूद खनिज जैसे कैल्शियम, जस्ता और आयरन शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित हो सकते हैं. वी एल लोफाई में फाइटेट मात्र 2.16 मिग्रा/ग्राम है, जबकि सामान्य मक्का में यह लगभग 3.0 मिग्रा/ग्राम होता है. इसका अर्थ है कि वी एल लोफाई मक्का न केवल उच्च उपज देता है, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी अधिक लाभकारी है. इससे पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.

स्रोत: भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा

English Summary: high yield maize varieties VL Madhubala VL Lofai northern piedmont farmers maize production
Published on: 21 January 2026, 02:55 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now