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Updated on: 24 June, 2026 6:07 PM IST

भारतीय कृषि के समक्ष सीमित प्राकृतिक संसाधनों से अधिक खाद्यान्न उत्पादन करने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखने की दोहरी चुनौती है. सिंचाई जल पर अत्यधिक निर्भरता तथा उर्वरकों के असंतुलित उपयोग, विशेषकर नाइट्रोजन के अत्यधिक प्रयोग एवं अन्य प्रमुख तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के कम उपयोग के कारण पोषक तत्व उपयोग दक्षता में कमी, मृदा क्षरण, भूजल प्रदूषण तथा उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं. सब्जी फसलें पोषक तत्वों की अधिक मांग करने वाली तथा सिंचाई के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए इनमें जल एवं पोषक तत्वों दोनों का सटीक प्रबंधन आवश्यक है. इस संदर्भ में, ड्रिप फर्टिगेशन—अर्थात ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जल में घुलनशील उर्वरकों का प्रयोग—संतुलित उर्वरक उपयोग, उच्च पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा बेहतर जल उत्पादकता प्राप्त करने की एक प्रभावी तकनीक के रूप में उभरा है.

ड्रिप फर्टिगेशन क्या है?

फर्टिगेशन वह प्रक्रिया है जिसमें उर्वरकों का प्रयोग सिंचाई जल के माध्यम से किया जाता है. इस प्रणाली में जल में घुलनशील उर्वरकों को सिंचाई जल में मिलाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली के एमिटर के माध्यम से सीधे पौधों के सक्रिय जड़ क्षेत्र तक पहुँचाया जाता है. यह प्रणाली जल एवं पोषक तत्वों दोनों का समान वितरण सुनिश्चित करती है तथा उनकी हानि को न्यूनतम करती है.

संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए ड्रिप फर्टिगेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

सब्जी फसलों को उनकी संपूर्ण वृद्धि अवधि के दौरान पोषक तत्वों की निरंतर एवं संतुलित आपूर्ति की आवश्यकता होती है. पारंपरिक उर्वरक प्रयोग विधियों में प्रायः बहाव, वाष्पीकरण, स्थिरीकरण तथा निक्षालन के कारण पोषक तत्वों की पर्याप्त हानि होती है.

ड्रिप फर्टिगेशन इन सीमाओं को निम्नलिखित प्रकार से दूर करता है:

• पोषक तत्वों को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र तक पहुँचाता है.
• फसल की विभिन्न वृद्धि अवस्थाओं के अनुरूप पोषक तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करता है.
• उर्वरकों की छोटी-छोटी मात्राओं का बार-बार प्रयोग संभव बनाता है.
• पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल की आवश्यकता के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करता है.
• पोषक तत्व अवशोषण दक्षता में वृद्धि करता है.

इस प्रकार, ड्रिप फर्टिगेशन 4R पोषक तत्व प्रबंधन सिद्धांतों के प्रभावी क्रियान्वयन का एक व्यावहारिक साधन बन जाता है:

फर्टिगेशन में सावधानियाँ

  • केवल जल में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग करें: यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट, एमएपी, एमकेपी)तथा जल में घुलनशील एनपीके ग्रेड उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित हो तथा ड्रिपर/इमिटर के अवरुद्ध होने की समस्या न हो.

  • उर्वरक घोल सही प्रकार से तैयार करें: उर्वरकों को अलग पात्र में अच्छी तरह घोलें तथा आवश्यकता पड़ने पर घोल को छान लें. कैल्शियम युक्त उर्वरकों को फॉस्फेट या सल्फेट युक्त उर्वरकों के साथ एक ही स्टॉक घोल में न मिलाएँ, क्योंकि इससे अवक्षेप बनने की संभावना रहती है.

  • उर्वरक इंजेक्शन का उचित समय अपनाएँ: सिंचाई की शुरुआत स्वच्छ जल से करें ताकि आवश्यक परिचालन दाब स्थापित हो सके. उर्वरकों का इंजेक्शन सिंचाई चक्र के मध्य चरण में करें, जिससे पोषक तत्वों का समान वितरण हो. इसके बाद 10–15 मिनट तक स्वच्छ जल चलाकर पाइपलाइन एवं इमिटर में बचे उर्वरक अवशेषों को बाहर निकाल दें, जिससे अवरोधन की समस्या न हो और प्रणाली की कार्यक्षमता बनी रहे.

  • फिल्ट्रेशन इकाइयों का रखरखाव करें: स्क्रीन, डिस्क अथवा रेत (सैंड) फिल्टरों की नियमित सफाई करें. उचित निस्पंदन पोषक तत्वों के समान वितरण को सुनिश्चित करता है तथा इमिटर के जाम होने से बचाता है.

  • अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें: फसल-विशिष्ट पोषक तत्व अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें. आवश्यकता से अधिक या कम मात्रा में उर्वरक देने से फसल की वृद्धि एवं उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

  • सिंचाई जल की गुणवत्ता की निगरानी करें: सिंचाई जल के pH तथा विद्युत चालकता की नियमित जाँच करें. निम्न गुणवत्ता वाला जल उर्वरकों की घुलनशीलता को कम कर सकता है तथा प्रणाली के भीतर अवक्षेप बनने का कारण बन सकता है.

  • प्रणाली का नियमित निरीक्षण करें: इमिटर, लेटरल, वाल्व तथा फिटिंग्स की समय-समय पर जाँच करें. किसी भी प्रकार के रिसाव या अवरोध को तुरंत ठीक करें, ताकि जल एवं पोषक तत्वों का समान अनुप्रयोग सुनिश्चित हो सके.

  • सुरक्षा उपाय अपनाएँ: उर्वरकों को संभालते समय दस्ताने तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें. उर्वरकों को सूखे, हवादार स्थान पर तथा बच्चों एवं पशुओं की पहुँच से दूर सुरक्षित रखें.

सब्जी फसलों के लिए अवस्था-वार फर्टिगेशन कार्यक्रम

फसल अवस्था

पोषक तत्व प्रबंधन

स्थापना अवस्था

कुल पोषक तत्वों की 25–30% मात्रा आधार (बेसल) खुराक के रूप में दें. जड़ों के विकास पर विशेष ध्यान दें.

वानस्पतिक वृद्धि अवस्था

नाइट्रोजन की अपेक्षाकृत अधिक मात्रा दें तथा फॉस्फोरस एवं पोटाश का संतुलित अनुप्रयोग करें.

पुष्पन अवस्था

फॉस्फोरस की आवश्यकता बढ़ जाती है, अतः इसकी मात्रा बढ़ाएँ तथा नाइट्रोजन की मध्यम मात्रा बनाए रखें.

फल विकास अवस्था

पोटाश की अधिक मात्रा का प्रयोग करें तथा कैल्शियम एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति भी सुनिश्चित करें.

यह अवस्था-वार पोषक तत्व प्रबंधन फसल को संतुलित पोषण प्रदान करता है, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाता है, उपज एवं गुणवत्ता में सुधार करता है तथा पोषक तत्वों की हानि को न्यूनतम करने में सहायक होता है.

 

सब्जी उत्पादन में ड्रिप फर्टिगेशन के लाभ

1. उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि

• उर्वरकों की 20–40% तक बचत होती है.
• फसलों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण एवं उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से होता है.

2. संतुलित फसल पोषण

•फसल की पूरी वृद्धि अवधि के दौरान पोषक तत्वों की समान एवं निरंतर उपलब्धता बनी रहती है.
• पोषक तत्वों की कमी तथा विषाक्तता की संभावना कम हो जाती है.

3. जल संरक्षण

• सिंचाई जल की 50–70% तक बचत संभव होती है.
• जल उपयोग दक्षता एवं जल उत्पादकता में वृद्धि होती है.

4. उपज एवं गुणवत्ता में वृद्धि

• बाजार योग्य उपज में वृद्धि होती है.
• फल एवं सब्जियों के आकार, रंग, आकर्षक स्वरूप तथा भंडारण क्षमता (Shelf Life) में सुधार होता है.

5. मृदा स्वास्थ्य में सुधार

• मिट्टी में पोषक तत्वों एवं लवणों के अनावश्यक संचय में कमी आती है.
• मृदा की जैविक सक्रियता में सुधार होता है.
• मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन बेहतर बना रहता है.

6. पर्यावरण संरक्षण

• नाइट्रेट के रिसाव में कमी आती है.
• भूजल प्रदूषण की संभावना कम होती है.
• उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है.

भविष्य की कार्ययोजना

सब्जी उत्पादन में संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाने चाहिए-

  1. मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं को प्रोत्साहित किया जाए.

  2. सरकारी योजनाओं के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) के दायरे का विस्तार किया जाए.

  3. फसल की विभिन्न वृद्धि अवस्थाओं के अनुसार फर्टिगेशन कार्यक्रमों को अपनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जाए.

  4. सेंसर एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया जाए.

  5. संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ाई जाए.

  6. किसान प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ किया जाए.

  7. समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए.

निष्कर्ष

ड्रिप फर्टिगेशन पोषक तत्वों एवं जल प्रबंधन की एक परिशुद्ध  तकनीक है, जो फसल को सही पोषक तत्व, सही मात्रा में, सही समय पर तथा सही स्थान पर उपलब्ध कराकर संतुलित उर्वरक उपयोग को सुनिश्चित करती है. यह तकनीक पोषक तत्व उपयोग दक्षता में वृद्धि, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा किसानों की आय एवं लाभप्रदता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सब्जी उत्पादन में ड्रिप फर्टिगेशन को व्यापक रूप से अपनाने से सतत कृषि विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की सहनशीलता को बढ़ावा मिलेगा. अतः यह तकनीक भारत में उत्पादक, लाभकारी एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है.

English Summary: drip fertigation for efficient water and nutrient management in vegetable crops
Published on: 24 June 2026, 06:13 PM IST

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