RFOI Award 2025: UP के सफल किसान मनोहर सिंह चौहान को मिला RFOI अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI - First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित RFOI Award 2025: केरल के मैथ्यूकुट्टी टॉम को मिला RFOI Second Runner-Up Award, 18.62 करोड़ की सालाना आय से रचा इतिहास! Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 11 August, 2023 12:31 PM IST
Cultivation of garlic through organic method

लहसून की खेती एक फायदे का सौदा तो होती ही हैअगर आप इसकी खेती जैविक तरीके से करते हैं तो यह आपकी आय हो दोगुना कर सकती है. बाजार में रसायन मुक्त सब्जियों की बहुत ज्यादा मांग होती है. लोग जैविक तरीके से उगाई जाने वाली सब्जियों के लिए अधिक कीमत भी देने को तैयार रहते हैं. ऐसे में आज हम आपको जैविक विधि से लहसून की खेती करने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं. जिस विधि को अपनाकर आप बंपर कमाई कर सकते हैं.

जैविक तरीके से खेत की तैयारी(Ready for crop)

लहसुन की जैविक खेती का सही समय जुलाई महीने की गर्मी में होता है. इस समय खेत की जुताई के बाद उसमें हरी खाद के साथ ढेंचा की बुवाई भी कर सकते हैं. यह ध्यान रखें कि आप समय-समय पर हरी खाद के साथ मिट्टी को पलटते रहें. खेती के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरुरी है. लहसून की बुआई के लिए  मेढ़ बनाकर की जा सकती है. मेढ़ की लम्बाई भूमि के ढाल के अनुसार ही बनाएं.

 खाद (fertilizer)

खेत के उपजाऊपन को बढ़ाने के लिए आप मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद और कम्पोस्ट को क्यारियों में मिला दें. आप अपने घर पर नीम की पत्तियों से निर्मित खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. खेत में कम्पोस्ट या गोबर खाद का प्रयोग लहसून की रोपाई के 15 से 20 दिन बाद ही कर दें.

सिंचाई(Irrigation)

लहसून की बुआई के बाद इसकी पहली सिंचाई 8 से 10 दिन के बाद कर देना चाहिए. इसकी अच्छी पैदावार के लिए दूसरी सिंचाई को 20 से 25 दिन के अन्तराल पर मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर करनी चाहिए. लहसुन की फसलों को हमेशा निराई-गुड़ाई की जरुरुत होती रहती है.

ये भी पढ़ें: लहसुन पैकिंग करवाकर तमिलनाडु भेज रहे किसान, हो रहा भारी मुनाफा !

भण्डारण (Storage)

लहसुन की फसल तैयार होने में पांच से छह महीने का समय लग जाता हैं. जब इसके पौधों की पत्तियां का रंग पीला दिखने लगे तो इसकी सिंचाई बंद कर दें और कुछ दिनों के बाद इसकी मिट्टी से निकालना शुरु कर दें. इन गठिलें लहसून को लगभग 3 से 4 दिनों तक छाया में सुखने के लिए रख दें. अब आप इसे घर के किसी सूखे स्थान पर रख दें. यह लहसून अगले 6 से 8 महीनों के तक भण्डारित करके रखा जा सकता है. एक एकड़ के खेत में आप आराम से इसकी खेती कर 2 से 3 लाख रुपये की कमाई कर सकते हैं.

English Summary: Cultivation of garlic through organic method
Published on: 11 August 2023, 12:36 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now