Success Story: जैविक उत्पादों के सहारे 20 एकड़ में अनार की सफल खेती, आधी हुई लागत, सालाना टर्नओवर 70 लाख रुपये तक! Rabi Crop Farming: रबी मौसम की फसलों की बुआई हेतु खेत की अग्रिम तैयारी फल और फूलों की खेती में प्रूनिंग के लिए उपयोगी हैं ये STIHL के टूल्स, जानें पूरा विवरण Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार!
Updated on: 16 April, 2023 6:03 PM IST

बिहार सरकार राज्य में मखाने की खेती को बढ़ावा दे रही है. इस कारण राज्य के किसान भी कम लागत में अच्छा मुनाफा होने के कारण इसमें अपनी रुचि भी दिखा रहे हैं. बिहार सरकार द्वारा मखाना की खेती शुरू करने वाले किसानों को बंपर सब्सिडी प्रदान करने जा रही है.

मखाना के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की खरीद के लिए उद्यानिकी विभाग शासन द्वारा 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है. इसकी यूनिट कॉस्ट 97 हजार रुपए है. इस सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान भाई बिहार कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, व्यक्तिगत निवेशकों के लिए 15 प्रतिशत और किसान उत्पादक संगठन के लिए 25 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है. बिहार की जलवायु मखाना की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. पूरे देश का 80 फीसदी मखाना बिहार में ही पैदा होता है. इसके अलावा इसकी खेती असम, मेघालय और ओडिशा में की जाती है.

मखाना की खेती के लिए जलाशयों, तालाबों और तराई के रुके हुए पानी में की जाती है. इसके लिए चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है. इसे धान के साथ भी उगाया जा सकता है. वर्तमान समय में इसकी खेती से किसान आसानी से प्रति हेक्टेयर 3 से 4 लाख रुपये की कमाई कर सकते हैं.

इसके सेवन से शारीरिक समस्या के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी बना रहता है. वजन कम करना, डायबीटीज, पेट की समस्या आदि चीजों में लाभकारी होता है. यह प्रोटीन का एक अच्छा श्रोत होता है. मखाना को भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जाता है. यह सूखे मेवे की श्रेणी में आता है. लोग इसे भून कर खाना पसंद करते हैं. इसे खीर में भी इस्तेमाल किया जाता है.

English Summary: Bihar government is providing subsidy on fox nut
Published on: 16 April 2023, 06:05 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now