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Updated on: 12 June, 2026 4:17 PM IST
सोयाबीन टॉप-3 हाई यील्ड किस्में (Image Source-AI generate)

खरीफ सीजन की देश में शुरुआत हो चुकी है और किसान भाइयों को तलाश है ऐसी उन्नत किस्मों की जिन फसलों से अधिक उत्पादन मिल सकें और बाजारों में अच्छी कीमत भी. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) द्वारा विकसित सोयाबीन की ये टॉप-3 किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभरी हैं. इन किस्मों में उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधकता और कम अवधि में पकने जैसी विशेषताएं शामिल हैं. यदि किसान सोयाबीन की इन तीन प्रमुख उन्नत किस्मों की पैदावार करते हैं तो बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

1. पूसा सोयाबीन 12

पूसा सोयाबीन 12 को वर्ष 2015 में विकसित किया गया था. अगर किसान भाई इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह इस किस्म से  128 दिनों के भीतर सिंचित परिस्थितियों में किसान लगभग 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही यह किस्म मुख्य रूप से उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है. सिंचित परिस्थितियों में इसकी औसत उत्पादन क्षमता लगभग 22.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है.

खासियत

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस और राइजोक्टोनिया ब्लाइट जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. इसकी फसल लगभग 128 दिनों में तैयार हो जाती है. बेहतर उत्पादन और रोगों से सुरक्षा के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानी जाती है.

3. पूसा सोयाबीन 9712

किसान अगर पूसा सोयाबीन 9712 किस्म का चुनाव करते हैं तो यह उनके लिए सही विकल्प साबित हो सकती है. साथ ही यह किस्म किसानों के बीच इसलिए लोकप्रिय है, क्योंकि किसान इस किस्म से सिंचित परिस्थितियों में इसकी औसत पैदावार लगभग 22.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं.

खासियत

इस खरीफ सीजन किसान अगर इस किस्म का चुनाव करते हैं तो वह इससे लगभग 115 दिनों में इससे उपज प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही सोयबीन की इस किस्म की खासियत यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को रोग प्रबंधन पर कम खर्च करना पड़ेगा, जिससे किसानों की मुनाफे की संभावनाएं बढ़ेगी.

पूसा सोयाबीन 6

पूसा सोयाबीन 6 वर्ष 2021 विकसित किस्म है और यह किस्म किसानों के लिए आधुनिक और उन्नत विकल्पों में से एक है. अगर इन क्षेत्रों दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के किसान इस खरीफ सीजन इस किस्म की बुवाई करते है तो वह कम वक्त में इससे अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. यानी की किसान 116 दिनों में लगभग 21.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. 

खासियत

इस किस्म की खासियत यह है कि यह मूंगबीन येलो मोजेक वायरस, राइजोक्टोनिया ब्लाइट और बैक्टीरियल पस्ट्यूल जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधी है. इसके अलावा यह स्टेम फ्लाई और डिफोलिएटर्स जैसे कीटों के प्रति भी मध्यम प्रतिरोध दिखाती है. इसके दानों का रंग पीला होता है और इसमें लगभग 20.7 प्रतिशत तेल पाया जाता है, जो प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी उपयुक्त माना जाता है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Best Soybean Top-3 Varieties High Production Farming
Published on: 12 June 2026, 04:22 PM IST

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