टारगेट प्लस का दम, गेहूं की फसल रहे खुशहाल हरदम…

कृषि क्षेत्र की जानी-मानी कृषि रसायन कंपनी एचपीएम ने यूं तो कई उत्पाद किसानों की फसल सुरक्षा के लिए मार्केट में उतारे हैं लेकिन खासतौर से गेहूँ की फसल के लिए कंपनी ने टारगेट प्लस उत्पाद बनाया है। गौरतलब है कि एचपीएम कृषि रसायन के क्षेत्र में एक उभरती हुई कंपनी है जिसने पिछले कुछ वर्षों में किसानों के मध्य एक पहचान बनाई है।

कंपनी के उत्पाद टारगेट प्लस में सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत व मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 5 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. मौजूद हैं। यह गेहूँ की फसल में फेलारिस माइनर व ब्राड लीफ वीड को खत्म करने में असरकारक उत्पाद है। यह सामान्यतः गेहूँ की फसल बुवाई के 30-35 दिन बाद या फिर पतवारों में चार पत्तियां हो जाने के बाद उपयोग किया जाना चाहिए।

मुख्य विशेषताएं -

  1. टारगेट प्लस उगने के बाद असर करने वाला एक चुनिंदा खरपतवारनाशक है।
  2. यह गेहूँ की फसल में गुल्ली डंडा और चैड़े पत्ते की खरपतवार का प्रभावशाली नियंत्रण करता है।
  3. कम मात्रा में खरपतवार प्रबंधन।
  4. जड़ों व पत्तों पर तीव्रता से दोहरा असर।

उपयोग का समय व मात्रा -

- इसका प्रयोग तब करें जब खरपतवार 2-4 पत्ते की हो या सामान्यतः गेहूँ बोने के 30-35 दिन बाद।

- 16 ग्राम प्रति एकड़ की दर से टारगेट प्लस के उपयोग की सिफारिश की जाती है।

छिड़काव के लिए घोल बनाना :

एक बाल्टी में 10 लिटर साफ पानी भरें। इसमें 16 ग्राम टारगेट प्लस डालकर लकड़ी की छड़ी से अच्छी तरह मिलाएं। मूल घोल बनाने के लिए उसी बाल्टी में 500 मि.लि. टीपी-मिक्स सर्फेक्टंट अच्छी तरह मिलाएं। अब इस मूल घोल में से 1 लिटर मात्रा, पानी से आधे भरे नैपसेक स्प्रेयर (15 लिटर क्षमता) में मिलाएं। बाकी आधे टैंक को साफ पानी से भरें। 1 एकड़ के लिए 10 टैंक उपयोग करें।

याद रखें

  1. टारगेट प्लस की तरल मात्रा का एक समान छिड़काव फ्लैट फैन नोजल लगे नैपसेक स्प्रेयर द्वारा करें।
  2. इसकी सिफारिश केवल गेहूँ और धान/कपास के पुनरावर्ती क्षेत्र में उपयोग के लिए की जाती है।
  3. सरसों या दाल जैसी द्विबीजपत्री फसलों को गेहूँ के साथ नहीं उगाना चाहिए।
  4. यदि चारा फसलें (जैसे ज्वार व मक्का) गेहूँ के बाद उगाई जाती है तो इसका उपयोग न करें।

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