फूलों की खेती कर योगी आर्थिक रूप से हुए मजबूत...

कहते हैं कि हौसले की उड़ान अकसर बुलंदियों की राह तलाश लेती है। बस केवल मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा होना चाहिए। प्रखंड के बारून उत्तर टोला निवासी योगी भगत ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। रोजी रोटी के लिए तमाम कवायद के बावजूद सफलता नहीं मिलते देख मालाकार योगी ने अंतत: अपने परंपरागत पेशा फूलों की खेती को ही अपनाना मुनासिब समझा। लगभग दो एकड़ क्षेत्र में फूलों की सफल खेती कर न सिर्फ अपने जीवन को सुगंधित किया बल्कि बागों में लगे फूलों की खुशबू व तितलियों की अटखेलियों से पूरे क्षेत्र के वातावरण को भी स्वच्छ बनाया। रास्ते से गुजरने वाले राहगीर भी फूलों की मनमोहक छटा व खुशबू से प्रफुल्लित हो उठते हैं।

योगी बताते हैं कि उनके पिता की मौत के बाद परिवार का इकलौता वारिस होने के चलते सर पर परिवार का बोझ आ गया। किसी तरह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करना शुरू किया। अचानक आर्थिक तंगी आने से मन विचलित होने लगा। बच्चे भी धीरे-धीरे बड़े होने लगे थे, जिससे खर्च बढ़ता गया। तब अपने परंपरागत पेशा फूलों की खेती को आर्थिक तंगी से निपटने के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। लेकिन इसके लिए उसके पास अपना खेत नहीं था, जिससे मंजिल अभी दूर दिख रही थी।

बतौर योगी उसके पास अपनी जमीन नहीं थी। तब उसने पट्टा पर जमीन लेकर छोटे पैमाने पर फूलों की खेती शुरू की। सफलता मिली तो मनोबल भी बढ़ा। वर्तमान में उसने दो एकड़ भूमि में गेंदा, गुलाब, चंपा, चमेली के अलावा अन्य मौसमी फूलों की खेती कर न सिर्फ अपने जीवन को सुगंधित बनाया बल्कि फूलों की खुशबू से पूरा वातावरण महक उठा है। योगी हर दिन फूलों को तोड़ एक धागे में पीरोकर स्थानीय बाजार के अलावा बिक्रमगंज, मलियाबाग सहित कई बाजारों में ले जाकर बेचते हैं। उससे जो आमदनी होती है, उससे परिवार की जीविका आसानी से चलती है। इसके अलावा शादी-विवाह सहित अन्य पार्टी-फंक्शन में भी योगी के खुशबूदार फूल अपनी महक बिखेरते हैं।

योगी की मानें तो वह फूलों की खेती को और व्यापक रूप देना चाहते हैं। कहते हैं कि अगर सरकार से अनुदान के रूप में सहयोग मिला तो यह पूरा क्षेत्र फूलों की खुशबू से महक उठेगा। जो न सिर्फ आर्थिक उपार्जन में मददगार बनेगा बल्कि वायु शोधन में भी कारगर साबित होगा। इनकी मेहनत व आधुनिक विधि से की जा रही फूलों की खेती से क्षेत्र के दूसरे किसानों में भी इसके प्रति ललक बढ़ी है। कई किसान आए दिन इनसे फूलों की खेती के गुर सीखने आते हैं, जिन्हें योगी प्रोत्साहित करते हैं।

योगी भगत ने फूलों की खेती से अपनी पहचान बनाई है। गत वर्ष सरकार द्वारा उद्यान के लिए अनुदान दिया गया था। इस वर्ष उद्यान के लिए अबतक कोई अनुदान की व्यवस्था नहीं है। इस वर्ष यदि अनुदान की सुविधा दी गई तो वैसे किसानों को चिह्नित कर उसका लाभ दिया जाएगा।

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