बस 20,000 की लागत से शुरू करें ये बिजनेस और करोड़ो कमाए...

सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लगे कि एक शख्‍स ने 500-500 रुपए में एक-एक ‘रानी’ बेचकर करोड़ों रुपए का कारोबार खड़ा कर दिया। न तो अब राजा-रानी का दौर है, न ही कभी रानियां बिकती थींं, तो यह शख्‍स किस रानी का बिजनेस कर रहा है।

हकीकत यह है कि जिस एक रानी की बिक्री 500 रुपए में हो रही है वह मधुमक्खियों की रानी ‘क्‍वीन बी’ है और इनका बिजनेस करने वाला व्‍यक्ति है पंजाब के कपूरथला निवासी श्रवण सिंह चांडी। देश में शहद का सालाना कारोबार करीब 80 हजार टन का है।

ऐसे में आपके पास भी यह मौका है कि कम पैसे और थोड़ी जानकारी लेकर आप ‘रानी’ मधुमक्‍खी का व्‍यापार आप भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं क्‍वीन-बी से जुड़े बिजनेस और इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें…

45 दिन में तैयार होती है रानी

क्‍वीन-बी तैयार करने के लिए एक विशेष किट की जरूरत होती है, जो ब्रिटेन व यूएसए से इंपोर्ट की जाती है।

रानी मक्‍खी तैयार करने के लिए 45 दिन की प्रक्रिया होती है। सारी प्रक्रिया 69 डिग्री सेल्सियश तापमान पर होती है।

इस किट की ट्यूब्स में मधुमक्‍खी के छत्‍ते से रानी मक्‍खी का लारवा रखा जाता है।

एक दिन बाद इस ट्यूब में बारी-बारी से दस नर मधुमक्‍खी (ड्रोन) से ब्रीडिंग करानी होती है।

इस प्रक्रिया के दौरान खास तकनीक, ट्रेनिंग और टूल्‍स की भी आवश्‍यकता होती है, जिससे ब्रीडिंग में नुकसान न हो।

45वें दिन रानी मक्‍खी तैयार हो जाती है। इसके बाद इसे शहद उत्‍पादन करने वालों को बेच दिया जाता है।

500 रुपए में बिकती है एक रानी

क्‍वीन-बी ब्रीडर श्रवण सिंह चांडी के अनुसार रानी मधुमक्खी कायापार शहद प्रोडक्शन से कहीं अधिक लाभदायक है।

कृत्रिम रूप से तैयार की गई रानी की अलग पहचान होती है इसके सिर पर एक टैग लगा होता है।

एक बॉक्स से शहद उत्पादन से एक साल में 2 से 3 हजार रुपए एक साल में कमाए जा सकते हैं लेकिन क्वीन से लाखों।

एक ब्रीड बॉक्स में 45 दिनों में 300 रानी मधुमक्खियां बनाई जा सकती हैं। एक मधुमक्खी की कीमत 500 रुपए से भी ज्यादा होती है।

केवल 45 दिनों बाद ही एक ब्रीड बॉक्स से 1.5 लाख रुपए तक कमाए जा सकते हैं। जबकि, शहद उत्पादन में ज्यादा वक्त लगता है।

शहद की अधिक कीमत के चलते एक मक्खी की कीमत 800 रुपए तक हो जाती है।

एक्‍स्‍पोर्ट भी करते हैं रानी को

श्रवण सिंह चांडी देश के सबसे बड़े क्‍वीन-बी ब्रीडर्स हैं। इनका शहर उत्पादन का भी बहुत बड़ा काम है।

इन्हें क्वीन ब्रीड उत्पादन के लिए पंजाब और भारत सरकार की ओर से कई अवार्ड भी मिल चुके हैं।

चांडी हर साल 5 करोड़ रुपए से अधिक कमाते हैं। घरेलू सप्लाई के अलावा ये रानी मक्ख्यिां एक्सपोर्ट भी करते हैं।

वर्तमान में ये प्रोग्रेसिव बी कीपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं और कई जगह ट्रेनिंग सेंटर भी चलाते हैं।

80 हजार मक्खियों पर चलता है राज

शहद उत्पादन करने वाले एक बॉक्स या छत्ते में 80 हजार तक मधुमक्खियां होती हैं, इनमें सिर्फ एक रानी मक्खी होती है।

छत्ते में एक रानी के अलावा ड्रोन, नर्स और वर्कर होते हैं। जिनका अलग-अलग काम बंंटा हुआ होता है।

एक रानी मक्खी की उम्र 5 साल होती है, जबकि वर्कर 45 दिन और ड्रोन मक्खियां 3 महीने तक जीती हैं।

रानी मक्खी का काम नर मधुमक्खी के साथ संपर्क में आकर सिर्फ बच्चे पैदा करना होता है।

रानी मक्खी के शरीर से एक खास खुशबूदार पदार्थ का रिसाव होता है जिससे उस छत्ते के सभी वर्कर शाम को छत्ते पर वापस आ जाते हैं।

छत्ते में एक नर्स मधुमक्खी भी होती है जिसका काम मरी हुई मक्खियों को निकालना और बच्चों को भोजन देना होता है।

20 हजार में शुरू कर सकते हैं काम

आप भी रानी मधमक्खियों का कारोबार कर सकते हैं इसके लिए शुरुआत में सिर्फ 20 हजार रुपए की जरूरत होगी।

30 मधुमक्खियों को बनाने के लिए किट सिर्फ 45 डॉलर में इंपोर्ट की जा सकती है।
इन दिनों किट कई ऑनलार्इन साइट्स पर भी उपलब्ध है, लेकिन इससे पहले आप किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें ले।

इसके अलावा पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी समेत देश के कई युनिवर्सिटी इसकी ट्रेनिंग भी देते हैं।


3400 करोड़ रुपए का है कारोबार

भारत में शहद का कारोबार करीब 3400 करोड़ रुपए का है। इसमें रॉ और प्रोसेस हनी शामिल है।

देश में करीब 2.5 लाख किसान बी किपिंग यानि मधुमक्खी पालन करते हैं।

सबसे ज्यादा मधुमक्खी पालक 33000 पंजाब राज्य में हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र गुजरात आदि राज्य आते हैं।

भारत का औसत रॉ शहद उत्पादन 15.32 किलोग्राम प्रतिवर्ष प्रति कॉलोनी या बॉक्स है। जबकि, पंजाब का 35 किलोग्राम है।

पुरी दुनिया में औसत उत्पादकता में पंजाब सबसे उपर है, दुनिया का औसत उत्पादन 28 किलोग्राम है।

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