चने की यह फसल सिर्फ दो बार के पानी में तैयार हो जाती है...



रबी सीजन चल रहा है, किसान भाई नयी फसलों को लगाने के लिए कृषि पर ध्यान दे रहें है आज हम आपको चने की उन किस्मों के बारे में बताएंगे जो सिर्फ दो पानी में तैयार हो जाती है. जेजी 11, जेजी 16, जेजी 63, जेजी 14 है। यह किस्म दो बार के पानी में तैयार हो जाती है। 90 दिन में फसल पक जाती है। खेत में पानी कम है तो जेजी 11 किस्म की बोवनी कर सकते है। यदि खरीफ में धान की बोवनी की है तो जेजी 11 में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन किस्म के बीजों में 20 से 25 क्विंटल उत्पादन होता है। इसी तरह जेजी 130 और विशाल किस्म का बीज 110-115 दिन में पक जाता है। इसका आकार बड़ा होता है। जेजी 74 में सिर्फ एक पानी की जरूरत होती है, इसमें 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है, यदि दोबारा पानी दे दिया तो उत्पादन बढ़कर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। 

बीज उपचार : बीमारियों से बचाव के लिए थीरम या बाविस्टीन 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज के हिसाब से उपचारित करें। राइजोबियम टीका से 200 ग्राम टीका प्रति 35-40 किग्रा बीज को उपचारित करें। 

बीज शोधन : राइजोनियम कल्चर का उपयोग करें। एक किलो बीज के शोधन के लिए पांच ग्राम ट्राइकोडर्मा और फास्फोरस प्रदायी जैव उर्वरक का उपयोग करें। राइजोनियम जेपोनीकम के बाद बने पीट कल्चर से शोधित करें। बोवनी से पहले बीजों को गीला करें। कल्चर को अच्छी तरह मिला दें। 

बीज दर और बोवनी : बोवनी के लिए अनुकूल समय 15 नवंबर तक है। देसी किस्मों के लिए बीज दर 75 से 80 किलो प्रति हेक्टेयर है। बड़े बीज या संकुल या काबुली चने किस्मों के लिए बीज दर 80-100 किलो प्रति हेक्टेयर है। बुआई बोवने की छोटी मशीन या सीधे भी की जा सकती है। बीजों को फैलाना नहीं चाहिए इससे नुकसान होता है। पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी होना चाहिए। बीज को 8 सेमी से गहरा नहीं बोवना चाहिए। बोवनी के लिए जो बीज उपयोग में लाए है उनकी अंकुरण क्षमता 90 फीसदी होना चाहिए। कतार से कतार की दूरी 30 सेमी होना चाहिए। 

खरपतवार नियंत्रण: फ्लूक्लोरोलिन 200 ग्राम (सक्रिय तत्व) का बुआई से पहले या पेंडीमिथालीन 350 ग्राम (सक्रिय तत्व) का अंकुरण से पहले 300-350 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ में छिड़काव करें। पहली निराई-गुड़ाई बुआई के 30-35 दिन बाद तथा दूसरी 55-60 दिन बाद आवश्यकतानुसार करें। 

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