किसान उत्पाद की कीमत का सही ज्ञान - श्री मिलन शर्मा

भारतीय कृषि में आधुनिकीकरण के चलते नित्य नए यंत्र, नवीन तकनीकियां, नए तरीके, नए एप्स आ रहे हैं जिनके माध्यम से किसानों को कई सुविधाएं एक ही मंच पर आसानी से मिल रही हैं। हालांकि किसान भी आधुनिकीकरण के चलते डिजीटल भारत की ओर अग्रसर हैं। ऐसे में उन्होंने भी डिजीटलीकरण को खेती में अपनाने का सुनहरा अवसर अपने हाथों से जाने नहीं दिया। इन सबके इतर गौर करने वाली बात यह है कि आज भी भारतीय किसान अपनी उपज का सही दाम लेने में अक्षम हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें उनकी उपज की न तो गुणवत्ता का ज्ञान है और न ही सही कीमत का अंदाजा वे लगा सकते हैं। डिजीटल भारत की ओर किसान कितने ही कदम क्यों न बढ़ा लें लेकिन जब तक उन्हें उनकी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा तब तक प्रधानमंत्री मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने का सपना साकार नहीं होगा और न ही भारतीय कृषि अपने नाम का परचम फहरा सकेगी।

इन्हीं सबके चलते भारतीय कंपनी इंटैलो लैब्स ने किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर उसकी सही कीमत बताने का बीड़ा उठाया है और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर किसानों को ऐसी पारदर्शी सुविधा देने का फैसला लिया है जिससे किसान अपनी उपज के सही दाम के लिए आसानी से मोलभाव कर सकेगा। कंपनी के सीईओ मिलन शर्मा ने कृषि जागरण से खास बातचीत में बताया कि किस तरह से किसान उनकी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं और अपनी उपज का सही दाम ले सकते हैं। 

बतौर मिलन हमने पिछले वर्ष 2016 में ही कंपनी की शुरूआत की है। हम कृषि तकनीकी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। खासतौर से हम किसानों को उनके उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित मूल्य का आंकलन कर उचित दाम बताते हैं। हालांकि एक वर्ष पहले तक मैं स्वीडन में था। मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री लेने के बाद नौकरी के लिए स्वीडन चला गया। कुछ समय बाद मुझे लगा कि अपने देश में जाकर ही कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि देश का भला हो सके। वहां जो भी सीखा उसे देश में जाकर इस्तेमाल करने से देश की तरक्की में मैं और मेरे दोस्त योगदान देना चाहते थे। इसी सोच के चलते हमने इंटैलो लैब्स कंपनी की शुरूआत की। फिलहाल हमारी कंपनी में 25 लोग कार्यरत हैं और हमारे कार्यालय भारत के साथ-साथ स्वीडन और यू.एस. में भी हैं। कंपनी का मुख्यालय बैंगलुरू में है। हम बहुत ही आसान तरीके से किसानों द्वारा उत्पादन सप्लाई चेन तक उचित दामों में पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं ताकि उन्हें उनके उत्पादन का सही दाम मिल सके। चूंकि भारत की धरा खेती के लिए सोने के समान है और यह देश हम सबकी जान है तो हमने सोचा कि क्यों न इस दिशा में ही अपने देश की सेवा की जाए। उत्पादन के मामले में हम भले ही इजरायल से पीछे हैं लेकिन खेती में हम ब्रिटेन और चीन से आगे हैं। भारतीय कृषि में अपार संभावनाएं हैं। हालांकि जब हम टिकाऊ खेती की बात करते हैं तो उसमें अभी हम अन्य देशों की तुलना में थोड़ा पीछे हैं। 

 अमूमन देखने में आता है कि किसान अपनी फसल पैदावार के लिए मंडी में जाता है या एफपीओ में जाकर अपनी उपज को बेचता है। यहां से उत्पादन कृषि विभाग में जाता है या सीधा मंडी जाता है जहां से उसे आड़तिया खरीदता है। आड़तिया से कोई दलाल खरीदता है। दलाल से यह उपज कोई प्रोक्यूरमेंट एजेंसी या वेयरहाउस या फूड प्रोसेसिंग या फिर रिटेलर खरीदेगा। ऐसे छोटे-छोटे खरीद-फरोख्त पड़ावों की वजह से किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है। इसमें कोई खरीदार है तो कोई विक्रेता। यदि हम भी कोई वस्तु खरीदते हैं तो उसकी जांच करने के बाद ही खरीदते हैं लेकिन ट्रेडिंग में किसी भी वस्तु की खरीद-फरोख्त के समय उसकी गुणवत्ता की जांच करना बेहद जरूरी है और यह बेहद कठिन काम है। ऐसे में होता यह है कि खरीदने वाला देखकर ही वस्तु की कीमत निर्धारित कर लेता है लेकिन जब वही माल वह बेचने निकलता है तो माल न बिकने की स्थिति में उसकी गुणवत्ता को आंका जाता है जिसे मापने के अपने निर्धारित मानक होते हैं।

 किसान जब अपना माल बेचने जाता है तो उसे पता ही नहीं होता कि वो किस ग्रेड का माल बेचने जा रहा है। यही कारण है कि अच्छी पैदावार और गुणवत्ता का माल होने के बावजूद उसे एक निश्चित दाम ही मिल पाता है। इंटैलो लैब्स किसानों को यही सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसान अपने माल की फोटो खींचकर हमें भेजें और हम उन्हें उनके उपज की गुणवत्ता के आधार पर उसकी सही कीमत बताएंगे। यदि हम गेहूँ की ही बात करें तो इसकी गुणवत्ता जानने के लिए ही 16 मानक सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। सबसे बड़ी विडम्बना यही है कि किसानों को कभी उनकी उपज का सही दाम मिलता ही नहीं है। ऊपर से इस सप्लाई चेन से जुड़े हर व्यक्ति को 5-10 प्रतिशत नुकसान हर बार होता ही है क्योंकि कई बार जो विक्रेता है वो माल को खरीदने के बाद बेच ही नहीं पाता। हम किसानों को यही तकनीक दे रहे हैं कि आप फोटो खींचकर हमें भेजिए और हम आपको उसकी सही गुणवत्ता बताएंगे जिससे आपको गुणवत्ता आधारित मूल्य का पता चल सकेगा। मंडी में अलग-अलग मूल्य के खाद्यान्न आपको मिलेंगे क्योंकि दामों में भिन्नता है लेकिन उत्पादों की गुणवत्ता का मूल्यांकन नहीं किया जाता है। इंटैलो लैब्स किसानों को उनके उत्पादन की सही गुणवत्ता का आंकलन कर सही जानकारी उपलब्ध करा रही है। फिलहाल हम रिलायंस फ्रेश के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम यह सुविधा किसी खास उत्पाद के लिए नहीं दे रहे हैं बल्कि सभी उत्पाद हमारी इस तकनीकी के तहत आते हैं। उत्पादों की गुणवत्ता के लिए सभी के अपने मानक होते हैं और वे उन्हीं के आधार पर किसी उत्पाद की गुणवत्ता का आंकलन करते हैं।

 उत्पादों की गुणवत्ता को ऐसे जांचे: आमतौर पर कोई भी व्यक्ति जब खरीदारी करने जाता है तो वो देख-परख कर ही किसी उत्पाद को खरीदता है। उसी तरह से यदि किसान मंडी में अपनी उपज लेकर जाता है तो उसकी उपज को भी देख-परख कर ही पता लगाया जाता है कि सही दाम कितना होगा। इसके लिए सरकार के अपने मानक तय हैं।

 राजस्थान सरकार है साथ: किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलवाने के लिए फिलहाल हम राजस्थान सरकार के साथ कार्य कर रहे हैं। यही नहीं हमने रिलायंस फ्रैश, वेयर हाउसिंग और 4 बड़ी प्रोक्यूरमेंट एजेंसीज के साथ भी हाथ मिलाया है ताकि अधिक से अधिक गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न बाजार में उपलब्ध हो सकें।

 500 बिलियन डॉलर की है इंडस्ट्री: एक स्टडी के आधार पर बताना चाहूंगा कि भारत में 500 बिलियन डॉलर की कृषि इंडस्ट्री है जिसमें जीडीपी का 17 प्रतिशत है। यहां बात सिर्फ इंडस्ट्री के वृहद् होने की नहीं है बल्कि ट्रांजैक्शंस की भी है। यदि किसी उत्पाद को आपने 10 बार बेचा है तो 10 बार ट्रांजैक्शंस हुआ है। वहीं वैश्विक बाजार की बात करें तो यह 5 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री है। इसमें भी यदि आप 2-3 प्रतिशत भी अगर गुणवत्ता मानकों के आधार पर उपज को बचानें में सफल रहे तो आप अंदाजा लगाइए कि इस इंडस्ट्री में कितनी संभावनाएं हैं। हमारी भविष्य की योजना भी यही है कि हम पूरी इंडस्ट्री में अपनी पहुंच बनाएं और इससे जुड़े लोगों तक सही तकनीकी पहुंचा पाएं। जहां तक प्रतिस्पर्धा की बात है तो हमें नहीं लगता कि इस तरह की सुविधा अन्य कोई दूसरी कंपनी दे रही है। यह तकनीकी किसानों के लिए भी नई है और बाजार के लिए भी।

फंडिंग की नहीं हुई दिक्कत: कंपनी की शुरूआत में हमें किसी तरह की आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि हम 25 लोगों का जो समूह है वो अपने-अपने क्षेत्र में किसी न किसी टॉप लेवल पर ही कार्यरत थे। चूंकि हमने एक परिकल्पना की और उसे मूर्तरूप देने के लिए सभी ने हाथ मिलाया। किसी भी स्टार्टअप के लिए आशावादी सोच का होना बहुत जरूरी है और इसी सोच के साथ हमने भारतीय कृषि क्षेत्र में कदम रखा है। आर्थिक संकट का सामना हमें नहीं करना पड़ा और सफलतापूर्वक हमने इस इंडस्ट्री में एक वर्ष पूरा कर लिया है।

किसानों को मंडियों से जोड़ेंगे: किसानों को हम तक पहुंचने के लिए हमने यह सुविधा मंडियों में ही उपलब्ध करवाने की योजना बनाई है। इसके लिए हम किसानों को मंडियों से ही जोड़ेंगे। एपीएमसी और ई-नाम के तहत सभी मंडियों का डिजीटलीकरण हो रहा है जिससे सभी मंडियां ई-नाम के तहत एक ही मंच से जुड़ गई हैं। किसान जैसे ही मंडी में प्रवेश करेगा उसे उसके गेटपास के साथ उसके द्वारा लाए गए माल की गुणवत्ता का भी पता चल जाएगा। इससे किसानों को बिचैलियों से राहत मिलेगी और वे अपने उत्पाद की गुणवत्ता के आधार पर सही मोलभाव कर उचित दामों पर अपनी उपज को बेच सकेंगे।

भारतीय कृषि की तुलना करना गलत: भारतीय कृषि की तुलना अन्य देशों की कृषि से करना गलत होगा। यूएस में 2000 किसान पूरे यूएस को खाद्यान्न उपलब्ध करवा रहे हैं। अन्य देशों में किसानों की संख्या कम है लेकिन खेती के लिए पर्याप्त जमीन है। विदेशों में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकी, कृषि यंत्र व खेती के तरीके काफी आधुनिक हैं जिनकी तुलना भारत से नहीं की जा सकती है। भारत में 85 प्रतिशत किसानों के पास 2 एकड़ से कम जमीन उपलब्ध है। यही कारण है कि वे अच्छी पैदावार व खेती के लिए कोई भी महंगी तकनीकी का इस्तेमाल नहीं कर सकते और न ही बड़ी-बड़ी मशीनें या कृषि यंत्र अपने खेतों में चला सकते हैं।

किसानों को बनाएंगे डिजिटलाइज्ड: हम अपनी तकनीकी से किसानों को डिजिटलाइज्ड बनाने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि आज हर किसान के पास मोबाइल है। किसानों को यदि सही जानकारी मिले तो ही उन्हें काफी फायदा हो जाएगा। किसानों को अपनी उपज कब, किस जगह, कितनी मात्रा में, किस मूल्य पर और किसे बेचनी है यदि पहले से पता चल जाए तो उन्हें उनकी उपज की अच्छी कीमत मिल सकती है। भारतीय कृषि की सबसे अच्छी बात यही है कि यहां पर कोई विरासती तंत्र नहीं है।

मानकों के साथ नहीं करेंगे छेड़छाड़: सरकार ने गुणवत्ता जांचने के लिए जो मानक निर्धारित किए हैं उनमें हम कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे। न हम सैप्लिंग प्रक्रिया में बदलाव करना चाहते हैं और न ही गुणवत्ता मानकों में बदलाव करना चाहते हैं। हम इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटलाइज्ड कर किसानों को पारदर्शिता देना चाहते हैं ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्य सीधा उन्हें ही मिले। फिलहाल यह सभी काम मैन्युअली ही हो रहा है क्योंकि स्किल्ड लेबर की बहुत कमी है भारत में।

किसान कर सकेंगे मोलभाव: हमारी इस सुविधा के माध्यम से किसान अब अपनी उपज का मोलभाव कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए किसानों को किसी तरह का कोई शुल्क नहीं देना होगा बल्कि यह सुविधा किसानों को मंडी में प्रवेश करते ही उसके गेटपास के साथ ऑफ कॉस्ट मिलेगी।

सरकार नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार: भारत सरकार नई तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उसने हमें भी एक सुअवसर दिया है कि हम भारतीय कृषि को एक नई दिशा दे सकें।

 

रूबी जैन 

कृषि जागरण, नई दिल्ली

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